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Summary
CJP का प्रोटेस्ट पॉलिटिकल बिलकुल नहीं था, लेकिन पुलिस ने छात्रों के साथ लाठियों से पीटना शुरू कर दिया। मेंस्ट्रीम मीडिया ने इसे उल्टा दिखाया और छात्रों को उत्पाती बताया। विपक्ष को सवाल है कि अगर उन्हें छात्रों के मुद्दों की परवाद थी, तो उन्हें छात्रों के साथ जुड़ना चाहिए था।
“एक जन आंदोलन है”From the report
CJP का प्रोटेस्ट पॉलिटिकल बिलकुल नहीं था 20 तारीक को जब छात्र संसत भवन की तरफ निकलते हैं तो पुलिस जो छात्रों के साथ ट्रीटमेंट करती है उस ट्रीटमेंट को समझी है पुलिस छात्रों को लाठियों से पीटती है कुछ लाठियां ऐसी भी दिखाई थी जिसमें कीले लगी हुई थी लोगों के उपर आसु गैस के गोले फेके जाते हैं कई चात्रों के सर फटे हैं, कून निकला है, चोट लगी है पैरेंट्स भी चोटे लुए हैं जो उस प्रोटेस्ट में शामिल थे ये तरीका था इस देश की सरकार का तमाम चात्रों को ट्रीट करना अब इस पूरे प्रोसेस को मेंस्ट्रीम मीडिया में भी कहीं जगए नहीं मिलती है बलकि तमाम बड़े बड़े चैनल उल्टा ये दिखाते हैं कि चात्रों ने उत्पात किया है और उनका मुद्धा ठीक नहीं है लेकिन आप इसका दूसरा फ्रेम भी समझिए इसका दूसरा फ्रेम ये है कि जब राहुल गांधी 20 तारीक के बाद 21 तारीक को प्रधान मंतरी के घर के बाहर धरने पर बैठने है तो पूरा मेंस्ट्रीम मीडिया अपने आप पहुँच जाता है और राहूल गांधी के साथ कॉंग्रेस के तमाम कारे करताओं को किस तरह से ट्रीट करना है इस पर सरकार का रवयया देखिए करने का तरीका, मीडिया का और सरकार का अलग अलग क्यूं है? सरकार से यह भी सवाल किया जा रहा है और विपक्ष से भी, कि अगर विपक्ष को चातरों के मुद्दों की परवाद थी, तो उन्हें चातरों के साथ जुड़ना चाइए ठान ना कि अलग से एक प्रोटेस्ट क सवाल ये भी उठा रहे हैं कि TV स्क्रीन पर राहूल गांधी के बैठने के बाद सिर्फ राहूल गांधी थे पेपर लीक का मुद्धा दब गया था अब इन सब सवालों के जवाब विपक्ष को देने चाहिए ताकि लोगों के मन में जो सवाल हैं उनके जवाब उन्हें मिले लोग इस आंदोलन से जुड़े ही इसलिए है क्योंकि एक जन आंदोलन है