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Summary
दिल्ली में तुरकमन गेट के पास एक दरगा है जिसका नाम है फैज ऐ इलाही जिसके आसपास की जमीन को कोट ने अबैद घोसित कर दिया है। पुलिस ने शांती पूर्वक काम करना चाहती थी, लेकिन भीड ने पत्तर उठाना शुरू कर दिया और पुलिस को लोट कर जाना पड़ा।
“कोई भी अगर बात आप सुनते हैं न कम से कम उसको परक तो लें उसको जांच तो लें क्या ये सच है क्या ये गलत है”From the report
सुनो ये लोग। यह बाशा बोली गई ये कल दिल्ली की सडकों पे एक दर्गा के सामने है। असल में ये निउज कल की है। जब पूरी दिल्ली सो रही थी, तब तुर्कमान गेट के पास 20 से 30 बूल्डेजर भेजे गए थे। दरशल बात यह है कि दिल्ली में तुरकमन गेट के पास एक दरगा है जिसका नाम है फैज ऐ इलाही ये दरगा के आफ़पर जितनी भी जमीन है वो कोट ने अबैद घोसित कर दिया है आईकोट का कहना है कि मस्जित के करीब जितनी भी जमीने है उनके पास उनके दस्ता बेज ही नहीं है जब रात के महाल में पुलिस वहाँ पे पोची इसलिए क्योंकि सांती पूर्वक काम करना चाते थे क्योंकि किसी को जादा तकलीफ ना हो लेकिन वही जमा भीड में कुछ चंद लोग ऐसे भी थे जो दंगा भड़काने का काम कर रहे थे और जैसे जैसे हफ़वा फैलती गई कि दरगा को तोड़ा जा रहा है अभी भीड ने एक बड़ा मोड ले लिया रोसवा के चलते उस भीड ने पत्तर वाजी का सिलसरा शुरू कर दिया पुलिस के उपर पुलिस ने भी अपने बचाओं में लाठी चार्ज करी गैस के हथकोले चोड़े लेकिन आखिरकार पुलिस को लोट कर ही जाना पड़ा और पुलिस वालों ने शांती पूर्वक उनको खाली करने का समय भी दिया था उस भीड से बोला भी गया कि आप अपने घर में से निकलाईए जो भी अबैद घर बने है पांच दस मिनिट के अंदर खाली कर दीजिये क्योंकि इनको तोड़ा जाएगा लेकिन उस भीड में कुछ उग्रबादियों ने उस भीड का ब्रेंवोश किया और साथ ही साथ उनको मजबूर कर दिया पत्तर उठाने पर असल में न्यूज ये थी कि दरगा के आसपास की चीजों को तोड़ा जा रहे हैं दरगा को हात भी नहीं लगाया ये MCD का कहना है कि दरगा को ख्रौच तक नहीं आई है तो मेरा ये मानना है कि भाईया कोई भी अगर बात आप सुनते हैं न कम से कम उसको परक तो लें उसको जांच तो लें क्या ये सच है क्या ये गलत है सरकार के दुआरा चुने गए पुलिस कर्मियों पर पत्तर उठाना क्या ये सही है