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Summary
Summary coming soon.
From the report
कि मीडिया तो सुनना नहीं चाहती है मीडिया तो साबित करने पर लगी हुई कि सारे बच्चे अंटिनैशनल ही प्रोटेस्ट पूरा अंटिनैशनल रहा है यह सब गलत हो रहा है बच्चे हैं और बाद सिर्फ भाइट 22 लाख बच्चों की नीट की बात नहीं है 6 करोड़ बच्चे भारत में जो कॉमटेटिव एग्जाम देते हैं वह 6 करोड़ बच्चे जो टेस्ट टेकर हैं जो कंपनीशन परिक्षा देते हैं चाहिए वह क्लैट लेते हूं MBA देते हों उसकी अप्लीयम्स का पेपर क्या बकवास बनाया था इस भारता मतलब अगर आपको आर्बिट्रेडी पेपर बना आया है उनके पंचे पता नहीं आए है कि नहीं है कुछ होंगे अब टेयरी पेपर था यूबीएसिच फिर लैंस का मतलब आप बैठो मैं बैठो कोई बैठे सब बराबर है उस पेपर में सब बराबर मतलब आपके बास कोई सिलेबस ही नहीं है तो आप कैसा पेपर बना रहे हैं तो यह बात सिर्फ नीट की नहीं बची है भाई यह बात ओवर ऑल बच्चों के मन में जो गुस्सा था ना यह पूरा लगाल क्या याद अगर यह सरकार प्यार सा सुनती स को सॉल्व करते तो यहीं तो चाहते हैं कि मूद्दा सॉल्व उनको रोजगार मिलें पेपर अच्छे हो हम यहीं तो चाहते हैं जो लोग सिर्फ नेपाल बना जाएं। किफीय नेपाल है भारत है मारा हिंदुस्तान हाम आप नेपाल इंडिविट का सिलोक करुटी डिमोक्रेटिक इन पर बच्चों के नारे ही नीय में बनाएंगे और नहीं था पता नियुक्त आपने एजुकेशन के प्रॉब्लम लड़ें भाई सरकार को सीधा बच्चों से वारतलाप करके education की problem solve करना है, Nepal Nepal नहीं बनाना है, भारत हमारा भारत रहेगा, भारत हमको जान से प्यारा है, सबसे प्यारा देश हमारा है, भाई.