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Summary
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की है।
From the report
पिछले कुछ समय में नीट पेपर लीग का मुद्धा अगबारों और टीवी की सुर्खियों में है सवाल एक परीक्षा की क्रेडिबिलिटी पर नहीं बलकी पूरे एक्जाम सिस्टम की अकाउंटिबिलिटी पर है लाको चात्रों ने सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक अपनी आवाज उठाई और अब दिल्ली के जंतर मंतर पर बड़ी संख्या में धरने पर बैठे हैं इसी बीच प्रधान मंतरी नरेंदर मोधी ने पहली बार इस मुद्धे पर बड़ा एलान किया उन्होंने कहा कि पेपर लीग से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रेक कोड बनाए जाएंगे ताकि ऐसे मामलों का जल्दी निप्तारा हो और दोशियों को सक्त सजा मिल सके आज के इस वीडियो में हम समझेंगे कि कैसे फास्ट टेक कोर्ट में आम अदालत के मुकाबले किसी भी मामले की सुनवाई तेजी से हो जाती है और इस एलान के बाद भी प्रोटेस्टर्स खुश क्यों नहीं है हाई मैं हूँ प्रगती और आप देख रहे हैं जिस्ट देश के युवाओं का भविष्य और उनका हित सरकार की सरवोष प्रात्मिकता है और परीक्षा व्यवस्था के साथ खिलवार करने वालों को किसी भी कीमत पर बक्षा नहीं जाएगा। गौर करने वाली बात यह है कि नीट पेपर लीग को लेकर देश भर में पिछले काई दिनों से कौकरो जनता पार्टी यानी CGP के नेतरित में चात्र लगातार प्रदशन कर रहे हैं। उनकी मांग सिर्फ दोशियों की गिरफतारी तक सीमित नहीं है बलकि पूरे एक्जाम सिस्टम में जवाब देही तै करने सक्त कानूनी कारवाई और ऐसी व्यवस्था बनाने की है जिससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके ऐसे माहौल में फास्ट रेक कोड की घोशना को सरकार के एक बड़े कानूनी कदम के तौर पर देखा जा रहा है सबसे बहले ये समझ लिये कि फास्ट रेक कोड कोई अलग तरह की अदालत नहीं होती ये उसी न्यायिक सिस्टम का हिस्सा होती है लेकिन इनने कुछ खास मामलों की सुनवाई को प्रात्मिक्ता देने की जिम्मेधारी दी जाती है लेकिन फास्ट टेक कोर्ट में कोशिश होती है कि सुनवाई लगतार चले तारीकों के बीच लंबा गैप ना आये और मामला बिना बेवजा लटके आगे बढ़े अब सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री के एलान के अगले ही दिन फास्ट ट्रेक कोर्ट शुरू हो जाएंगे दरसल इसके लिए एक तैप रकरिया होती है सरकार और संबंदित हाई कोट मिलकर प्रोसिस तै करते हैं इसके बाद जज्जिस की तैराती स्टाफ और दूसरी ज़रूरी वैवस्थाई की जाती है कई बार पहले से चल रही किसी अदालत को ये जिम्मेदारी दे दी जाती है जबकि जरूरत पढ़ने पर नई अदालते भी बनाई जा सकती है इसलिए किसी गोशना के बाद उसे जमीन पर लागू होने में थोड़ा समय लगना सामानने बात है लेकिन एक और बात समझना बेहत जरूरी है Fast Track का मतलब Instant Justice नहीं होता अगर किसी मामले में कई गवा है Digital सबूतों की जाच बाकिये केस काफ़े मुश्किल है तो अदालत उन प्रक्रियाओं को छोड़ नहीं सकती यहां सिर्फ इतना फर्क होता है कि मामलों को प्रात्मिक्ता दी जाती है ताकि बिना वज़ा होने वाली देरी कम हो और सुनवाई लगतार आगे बढ़ती रहे यह पहली बार नहीं है जब किसी मामले में फास्ट रेक कोड बनाने की बात की जा रही हो दरसल भारत में फास्ट रेक कोड का कॉंसिप्ट नया नहीं है इसकी शुरुवात करी 25 साल पहले हुई थी साल 2000 में देश के अदालतों में पेंडिंग केसिस की बढ़ती संख्या को देखते हुए केंदर सरकार ने पहली बार बड़े पैमाने पर फास्ट रेक कोड शुरु करने की योजना बनाई उस समय मकसद किसी एक तरह के अपराद की सुनवाई करना नहीं था बलकि ऐसे मामलों का बोज कम करना था जो सालों से अदालतों में अटके हुए थे 11th Finance Commission की recommendation पर केंदर सरकार ने राज्यों को इसके लिए पैसा दिया इसके बाद देश भर में एक हजार से जादा फास्ट रेक कोड शुरू किये गए शुरुवाती सालों में इन अदालतों ने लाखों मामले सुलजाए लेकिन कुछ साल बाद एक नई चुनौती सामने आई केंद सरकार की funding खत्म होने लगी और कई राज्यों के लिए इन्हें चलाना मुश्किल हो गया नतीजा ये हुआ कि कुछ राज्यों ने अपने बजट से इन्हें जारी रखा जबकि कई जगा इनकी संक्या धीरे धीरे कम होती गई यानि फास्ट ट्रैक कोड पूरे देश में एक जैसी व्यवस्था कभी नहीं बन पाए हर राज्य ने अपनी जरूरत और संसाधनों के हिसाब से इन्हें चलाया साल 2012 में दिल्ली के निर्भया गैंग रेप की घटना ने पूरे देश को झगजूर दिया देश 2019 इस बार महिला और बच्चों के खिलाफ यौन अपरादो खासकर POSCO आक्ट और रेप के मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रेक स्पेशल कोर्ट शुरू किये गए इनका उदेश्य था कि ऐसे सम्वेदनशील मामलों में ट्रायल को प्रात्मिक्ता मिले और पीडितों को सालों तक फैसले का इंतजार ना करना पड़े यानि अगर पिछले 25 साल के इतिहास को देखे तो फास्ट ट्रेक कोड कस्तेमाल भारत में कई तरह के मामलों में किया जा चुका है लेकिन पेपर लीग जैसे मामलों को इस तरह प्रात्मिकता देनी की घोशना पहली बार राश्ट्य स्तर पर की गई है यही वज़े है कि नीट विवाद के बीच प्रधान मंतरी मोधी के इस एलान को एक महतपून कानूनी और नीतिगत कदम माना जा रहा है हालांकि प्रधान मंतरी के इस एलान के तुरंद बाद CGP की तरफ से भी प्रतिक्रिया सामने आई संगठन ने सोशल मीडिया प्लाटफॉर्म X पर सिर्फ चार शब लिखे धर्मेन प्रधान मस्ट रजाई यानि CGP ने साफ कर दिया कि उसके मताबिक सिर्फ फास्ट एक कोट की गोशना काफी नहीं है और उसकी मांग अभी भी वही है कि केंद्रिय शिक्षा मंतरी धर्मेन परढान अपने पज से स्थिफा दे इसके अलावा के स्ठी के अभिजी दिपके ने भी प्रधान मंतरी मोधी की पॉस्ट को कोट करते हुए सिक्षा मंत्री धर्मेन प्रधान की एक तस्वीर शेयर की जिस पर लिखा था Hi, I am nothing इस पोस्ट के जरिये CJP ने सरकार पर निशाना साथते हुए आरोप लगाया कि सिक्षा मंत्री की जवाब देही तै करने से बचा जा रहा है बाद में CGP के स्पोक परसन आशुतोष रांका ने एक वस्तरित बयान भी जारी किया उन्होंने कहा कि फास्ट रेक कोर्ट की घोशना असली समस्या का समधान नहीं है उनके मताबिक अगर पेपर बार बार लीक हो रहे हैं तो इसकी वज़ा फास्ट ट्रेक कोड की कमी नहीं बलकि परिक्षा वैवस्था की खामिया और सरकार की जवाब दे ही है रांका ने आरोप लगाये कि सरकार मूल सवालों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है जबकि जरूरत उन कारणों को खतम करने की है जिनकी वज़ासे बार-बार पेपर लीग जैसी घटनाएं हो रही है मैंने अब मिर्जी ने भग कोर्ड बनाने की बात की है जिससे पेपर लीको ने के बाद व्यक्तियों को जल्दी सजा मिल सके लेकिन मूदी जी आप यह बताइए कि पेपर लीक स्थिति OECD हो रहे हैं पेपर लिख इसलिए हो रहे हैं क्योंकि आपने ऊपर से लेकर नीचे तक इस देश में सिस्टम में नकारा नाकाबिल लोग बिठाए हैं जिसमें धर्मेंत प्रधान टॉप पर हैं पेपर लीक को अगर आप रोकना चाते हैं तो धर्मेंदर पधान को हटाईए सिस्टम में अकाउंटिबिलिटी लेकर आईए स्ट्रक्चरल प्रॉब्लम सॉल कीजे दूसरी तरफ नीट पेपर लीक को लेकर शात्रों का अंदोलन लगतार जारी है कौकरो जंदा पार्टी यानी सी जेपी के नेतरित में पिछले कई दिनों से बड़ी संख्या में चात्र और समर्थक सडको पर उतर रहे हैं और परीक्षा प्रनाली में पारदर्शिता जिम्मेदारी तै करने और केंद्रिय सिक्षा मंतरी धर्मेन प्रधान के स्थिफे की मांग कर रहे हैं बीच जुलाई को आयजूई संसद चलो मार्च के दौरान प्रदशन कारियों और दिल्ली पुलिस के भी झड़ब भी देखने को मिले कई प्रदशन कारियों को हिरासत में लिया गया, चब कि पुलिस ने बैरिकेडिंग कर मार्च को संसद की तरफ बढ़ने से रोक दिया ऐसे माहौल में प्रधान मंतरी मोदी की फास्ट ट्रेक कोट वाली घोषना को आंदोलन के बीच आया एक एहम राजनीतिक और कानूनी संदेश माना जा रहा है। आपको ये भी बता दे कि 20 जुलाई को ही CJP के प्रतिनिधी सौरवदाश और आशुतो शांका ने केंद्रिय मंत्री जेपी नडडा से मुलाकात की थी। और उन्हें अपनी तीन प्रमुख मांगों का लिखित ग्यापन सौपा। पहली मांगती कि केंदिय शिक्षा मंत्री धर्मेन प्रधान को उनके पत से हटाया जाए या वो स्थिफा दे दूसरी मांगती कि आंदोलन के समर्थन में अंचन कर रहे सामाजी कारे कर्ता सोनम बांकचुक को तुरंत रिहा किया जाए तीसरी मांग थी कि नीट विवाद से जुड़े कथित शात्र आत्महत्या मामलों में प्रभावित परिवारों को एक करोड रुपे का मुआवज़ा दिया जाए बैठक के बाद CJP नेताओं ने कहा कि सरकार की तरफ से किसी भी मांग पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला इसलिए आंदोलन जारी रहेगा फिलाल आंदोलन खत नहीं हुआ है जंतरमंतर के आसपास अब भी प्रदशन जारी है और CGP का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगो पर सपश्ट फैसला नहीं लिया जाता तब तक धर्ना और विरोध प्रदशन जारी रहेंगे इस मुद्दे पर आप अपनी राय हमें कॉमेंट करके जरूर बताए देश जुनिया और आपसे चुड़ी हर खबर के लिए देखते रहे जिस्ट