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Summary
कवि ने सियासतारों से हकदारों के अधिकार की बात करते हुए कविता सुनाई और तालियां बजवाईं।
“सत्ता जन्ता की है पर अपनी सरकार चलाते हैं”From the report
मुझे निरबाद बोलने दिया जाये नहीं तो मैं � مर जाऊंगा जिस दिन सियासतारों से हकदारों का अधिकार � searchisten और उनको अधिकार मांगाये जिस सियासतारों से हकदारों का अधिकार सड़क से संसद तक सड़क सड़क जिस दिन निकल पड़ेगी जनता लेकर पता का, नीच विमान का उस दिन क्या होगा इन राजनीती के दलालों का, समाज के तताकती ठेकदारों का शियासादारों के चाडुकारों का, है कोई यहां जो इसका ठीक-ठीक अनुमान लगा पाएगा लेकर हमारा मत ये अपनी सरकार बनाते हैं लेकर हमारा मत ये अपनी सरकार बनाते हैं कहते हैं सत्ता जन्ता की है पर अपनी सरकार चलाते हैं इनकी महता कांचा पूरी हो गई हमारे कांचाों का गला दबाते हैं सिक्षा, चिक्चा, सुरक्षा दो सासन पर सासन अच्छा दो