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Summary
लोगों ने प्रधानमंत्री को खून से पत्र लिखने से लेकर पद्यात्रा तक की है, लेकिन उनकी आवाजें सुनाई नहीं दे रही हैं। उन्होंने 2022 से संघर्ष कर रहे हैं और अपनी आवाजें पहुंचाने के लिए कई तरीके अपनाए हैं।
“क्या मतलब दिल्ली की मीडिया हो या दिल्ली की लोगों, क्या सुन पा रहे हैं यहाँ पर जिस तरीके का धरना आपलो कर रहे हैं?”From the report
प्रधानमंत्री को खून से पत लिखने से लेके पदियात्रा है, जल सत्यागर है, मिट्टी सत्यागर है, वो तक कर लिया लोग यहाँ पर भूख अड़ताल पर भी हैं, चिताओं पर लेटे हैं, सूली पर लोग अपने आपको लटका रहे हैं तो आपको लग रहा है कि देश सुन रहा है ना आवाजों को, क्या मतलब दिल्ली की मीडिया हो या दिल्ली की लोगों, क्या सुन पा रहे हैं यहाँ पर जिस तरीके का धरना आपलो कर रहे हैं? हम लोग लगातार 2022 से संघर्च कर रहे हैं अपनी आवाद को जिस तरह से पहुंचा सकते प्रधानमंत्री को खून से पत्त लिखने से लेकर पद्यात्रा है जल सत्यागर है मिट्टी सत्यागर है और एप्रेल में जो हमारा बाराय मांक अंतरराष्ट्रीय चिता अंदोलन जो प्रचलित रहा वो तक कर लिया और इससे बात तो देखो सब जगह पहुंचती है यदि हमारे अच्छा तरफ जिला में कोई छोटी सी घटना घटित होती है तो वह मुखमंत्री द्वारा मुखमंत्री तक पहुंच जाती है मुखमंत्री द्वारा ट्विट किया जाता है फेसबुक पर पोस्ट किया जाता है तो एक अंतररश्ट्री आंदोलन की भनक मुखमंत्री और पीएम तक क्यों नहीं पहुंच पाई होगी जरूर पहुंची होगी लेकिन वह उन्होंने सफेशी यूजंट पर कन्हारक बंदेल खंड़ व्यास उपयोग करते थे इस प्रोजेक्ट प्रोमिस्ट ग्रीन बुंदेल खंड बाय अलिगेशन और करप्शन