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Summary
प्रदानमंत्री ने खुद किया था आप बताइए कि इससे क्या-क्या नुकसान हुआ है यहां के ट्राइबल लोगों को आदिवासी लोगों को क्या-क्या नुकसान उनका पूरा जंगल जा रहा है 46 लाख पेड़ जा रहा है पूरा पन्ना रिजर्प लिए जाए रहा है इनकी महुआ चिरवा चिरोंजी जो इनकी अजीविका का एक मात्रू था इनका कौसल नीबा बनों का कौसल यह अब इनको इनके बणों से उजान के बिनर्पणावाजदि यह कहीं भी फेक दिया जा रहा उनकी पूरी जिंदगी तबाह रही है
“यहां पर पानी नहीं आ रहा था मिट्टी वाला पानी पीना पड़ा।”From the report
प्रदानमंत्री ने खुद किया था आप बताइए कि इससे क्या-क्या नुकसान हुआ है यहां के ट्राइबल लोगों को आदिवासी लोगों को क्या-क्या नुकसान उनका पूरा जंगल जा रहा है 46 लाख पेड़ जा रहा है पूरा पन्ना रिजर्प लिए जाए रहा है इनकी महुआ चिरवा चिरोंजी जो इनकी अजीविका का एक मात्रू था इनका कौसल नीबा बनों का कौसल यह अब इनको इनके बणों से उजान के बिनर्पणावाजदि यह कहीं भी फेक दिया जा रहा उनकी पूरी जिंदगी तबाह रही है इनकी वह आदिवासीयों ग्रामीवनों की ऊपर सिर्फ अपना हक मांगने की वजन में केज़ दर्ज कर दी गए फर्जी की बुरी-बुरी धाराओं के साथ इनके साथ इतना अमानवी व्यवहार किया जा रहा है इनकी तो पूरा सबको जीवन लिया 50 हजार लोग बेघर हो रहे हैं बिना कानून का पालन की परियोजनाओं में और यह लोग अमाराणांसन चिताओं पर लेटे हुए हैं इनको गंदा पानी पीने पर मजबूर किया जा रहा है आप यहां पर यहां पर पहुंचाय थी कि पानी कि लाइक कांटि है तो यहां पर पानी नहीं आ रहा था मिट्टी वाला पानी पीना पड़ा। पानी पीने का, पानी की टंकी का पानी जो था जो भी उतना साप नहीं था लेकिन आप केशक के रश साप था। उससे भी पूरा भाँ दिया गया। पानी पीने के लिए मजबूत नदी का जो प्रदूसत पानी है मिट्टी वाला यह पीने के लिए हमको मजबूर किया गया