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Summary
मैंने अपने अंशन का आज ग्यारावा दिन खत्म किया है, मैं अंदर से मजबूत हूँ लेकिन बाहर से कमजोर लगता हूँ। मैंने सोचा है कि हमारे देश का संसद जहां पर निर्णय लिए जाते हैं, बहस होती है, नीतियां बनती हैं वहां पर एक शांतिपूर्ण मार्च करेंगे।
“क्या आप तैयार हैं अगर मैं कहूँ कि 20 जुलाई को जब संसद का मौनसून सत्र शुरू होता है तो मेरे साथ आप लोग भी जंतरमंतर से संसद तक एक शांतीपूर्ण मार्च करें”From the report
मेरे अंशन का आज ग्यारावा दिन खत्म हो रहा है मैं अंदर से मजबूत हूँ मगर शायद बाहर से कमजोर लगता हूँ कल शायद मैं शेव करके मूँ धोके आओं तो बाहर से भी ठीक लगूँ इसलिए शायद आप लोगों में से देश बर से सैंक्रों लोगों ने मुझे मैसेजिस बेजे हैं कि मैं अंशन तोड़ दो कुछ खा लूँ और मेरे लिए भी ये बहुत आसान बात है मैं चला जाओंगा, खाता पीता रहूंगा मगर क्या इससे रिया और आकांख्षा जैसे 20 बच्चों ने जो आत्महत्याएं की हैं वो रुप जाएंगे या फिर अगले साल 40 बच्चे फिर 80 बच्चे और आत्महत्याएं करते जाएंगे शायद आपको फरक नहीं पड़ता क्योंकि शायद रिया आपके गर से नहीं आपकी बहन नहीं और हमारा ये सिस्टम कब सुदरेगा या फिर लदाक और हिमाले के परबत और नदियों को क्या हम बचा पाएंगे पिलहाल तो मैं ये कह सकता हूँ कि अगले 10-12 दिन मेरे सिहत को कोई फरक नहीं पड़ने वाला है तो फिर घर के सोफे से मुझे संदेश बेजने से थोड़ा ज्यादा आप हरकत कर सकते हैं हम सब मिलके कुछ कर सकते हैं ताकि ये सब ना हो और उसके लिए मैं ये सोच रहा हूँ कि सबसे सही जगा है हमारे भारत का संसत जहांपर निर्ने लिये जाते हैं, बहस होते हैं, नीतियां बनती हैं तो क्या आप तैयार हैं अगर मैं कहूँ कि 20 जुलाई को जब संसत का मौनसून सत्र शुरू होता है तो मेरे साथ आप लोग भी जंतरमंतर से संसद तक एक शांतीपूर्ण मार्च करें अगर ऐसा कर सकते हैं तो बहुत कुछ बदल सकता है इसके लिए आपको दिल्ली आना होगा और मेरे साथ इस शांतीपूर्ण मार्च में जुड़ना होगा बताईएगा जरूर क्या आप करने को तैयार हैं नीचे कमेंस में या फिर जो लिंक दिया है उसमें कहीएगा मैं तैयार हूँ तो मुझे विश्वास होगा कि हमारा देश भी बचेगा और मेरी जान भी जैहिंग