Part of a cluster — open full story hub

Summary
600 से ज़ादा गाओं पानी में डूबे हैं, 68 लोग की जाने जा चुकी हैं, करीब 6.5 लाख लोग अभी बाल से प्रभावित हैं...
“असम की बाल सिर्फ आसमान से वरसने वाले पानी की कहानी नहीं यह ब्रह्मपुत्र की ताकत की कहानी है...”From the report
600 से ज़ादा गाओं पानी में डूबे हैं, 68 लोग की जाने जा चुकी हैं, करीब 6.5 लाख लोग अभी बाल से प्रभावित हैं, हजारों लोग राहा शिवरों में हैं, सेना एंडियारफ और SDRF लगतार बचाओं में जुटी हैं. इसी बीच कॉंग्रेस अध्यक्ष मलिका अर्जुन खड़के ने केंद्र और असम सरकार पर बादे पूरे ना करने का आरूप लगाते हुए पूछा है कि 10 साल बाद भी असम हर साल क्यों डूब रहा है सच कहें तो ये सवाल सिर्फ राजनीत का नहीं है क्योंकि असम ऐसा राज है जिसकी खबरें अकसर राश्टरी मीडिया की सुर्खियों से जल्दी गायब हो जाते हैं लेकिन हर मौनसून के साथ यहां लाखों लोग एक जैसी तरासदी जीते हैं घर बैजाते हैं, खेतन खत्म हो जाते हैं, बच्चे स्कूल छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं और कई परिवार अपनों को हमेशा के लिए खो देते हैं ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर असम में हर साल इतनी भीशड बार क्यों आती है असम की बाल सिर्फ आसमान से वरसने वाले पानी की कहानी नहीं यह ब्रह्मपुत्र की ताकत की कहानी है हिमालय की बनावट की कहानी है जंगलों की कटाई की कहानी है बेतरती विकास की कहानी है और जल वायू परिवर्तन की भी कहानी है अतनाक तस्वीर एक 13 साल के बच्चे ने छोड़ दी इन एन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मताबिक शिवसागर जिले के बामुन पुखरी गाओं का रहने वाला हरदीप पनिका साथवी कक्षा का छात्र अपने माता पिता के इकलोती संतान जब बाल का पानी गाओं में ते� पहले ही बार में उजड़ चुका हो उसने अपना एकलोता बेटा भी खो दिया। सोशल मीडिया पर वारिल हुई तस्वीरों में हरदीप का शव रखा था। उसके माता पिता फूट फूट कर रो रहे थे और पास में वही पिल्ला चुप चाब बैठा था। इसे बचाने के लिए हरदीत ने अपनी जान दौंपर लगा दी।