
Summary
कंगना रणौत ने कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया और उन्हें पश्चिमी सोच वाली कहा, जो नशे और शराब को आजादी समझती है।
“कंगना रणौत ने कहा, 'ये पश्चिमी सोच वाली है, नशे और शराब को आजादी समझती है।'”From the report
बीजेपी उतना विपक्ष से शायद ही डरती हो जितना अपनी ही सांसद कंगना रणाथ से विपक्ष जो नुकसान महीनों में बीजेपी का कर पाता होगा उतना कंगना एक इंस्ट्रग्राम पोस्ट से कर देती है इस बार कंगना के निशाने पर कॉकरो जंता पाटी के आंदोलन में शामिल जैनजी लड़किया नहीं उन्होंने उन्हें गटर जेनरेशन कहा कहा कि ये पश्चमी सोच वाली है, नशे और शराब को आजादी समझती है, माता पेता के पैसों पर जीती है, समाज को कुछ नहीं दे सकती, यहां तक कह दिया कि अच्छी ग्रिहनी यानि होम मेकर भी नहीं बन सकती यही बात सिफ एक बयान की नहीं रह जाती क्योंकि कंगना ने एक नहीं, दो नहीं, बलकि लगतार कई इंस्टरग्राम स्टोरीज में आंदोलन को निशाना बनाया पहले वीडियों को उल्टी लाने वाला बताया, फिर प्रदर्शन कारियों को बजसूरत कहा, उनके कौकरोच वाले प्रतीक का मजाक उडाया और आखर में पूरी एक पीढी की लड़कियों पर सवाल खड़े कर दिये अब यहां सवाल ये नहीं है कि आंदोलन सही था या गलत अगर किसी प्रदर्शन कारी ने हिंसा की सार्जनिक रूप से संपत्ती को नुकसान पहुचाया तो उसकी आलोचना होनी ही चाहिए लेकिन आलोचना और अपमान में फर्क होता है और कंगना के बैयान उस सीमा को पार करते दिखते हैं। यहीं से मामला राशनितिक हो जाता है क्यूंकि कंगना सिर्फ अभिनेतरी नहीं है वो बीजेपी उसी जेंजी की लड़कियों के लिए ऐसी भाषा पाटी के लिए राजनतिक असहेश्टा पैदा कर सकती है एक तरफ प्रधान मंतरी नरेंद्र मोदी युवाओं से संभाद करते हुए दिखाई दे रहे हैं नई पीडी को देश का भविश्य बता रहे हैं दूसरी तरफ उनकी ही पार्टी की सांसर उसी पीढ़ी को कटगरे में खड़ा कर देती है। नतीजा आंदोलन पर बहस कम होती है और कंगना के बयान पर जादा। यही भसमासूर की कहानी यादाती है भसमासूर की ताकत सबसे बड़ा खत्रा उसके दुश्मनों के लिए नहीं बने थी बलकि उसी के लिए बने थी जिसने उसे ताकत दी थी. राशनिती में भी कई बार सबसे बड़ी मुश्किल बहार से नहीं भीतर से खड़ी होती है. लोगों ने भी पलटवार कहा, CJP के ही प्रवक्ता सौरवदास ने कहा कि अब तो कंगना को उनकी ही पाटी सीरिस नहीं लेती है। यानि एक बयान और बीजेपी फिर बचाओ की मुद्रा में। राजनती में कई बार विपक्ष नहीं, अपने ही शब्द सबसे ज़ादा भारी पर जाते हैं और फिलहाल कंगनार अनौत के बयान बीजेपी के लिए वैसी ही चिनौती बनते नजर आ रहे हैं. आप इस पर क्या सोचते हैं कमेंड बॉक्स में हमें बताईएगा नमस्कार