
Summary
अयोध्या राम मंदिर में चड़ावे से करोडो रुपे की चोरी के आरोप सामने आये हैं 2020 में बनाया गया श्री राम मंदिर जन्म भूमी ट्रस्ट बिलकुल गोपनिय तरीके से बिना पारदर्शता के काम करता रहा है
From the report
अयोध्या राम मंदिर में चड़ावे से करोडो रुपे की चोरी के आरोप सामने आये हैं 2020 में बनाया गया श्री राम मंदिर जन्म भूमी ट्रस्ट बिलकुल गोपनिय तरीके से बिना पारदर्शता के काम करता रहा है ठीक PMKS ट्रस्ट की तरह राम जन्मभूमी ट्रस्ट को भी सरकार ने सूचना के अधिकार कानून के दाइरे से बहार रखा है ये कहकर कि वे पबलिक अथौरिटी नहीं है। कोई भी नागरिक, कोई श्रद्धालू, ट्रस्ट के कामकाज के बारे में या मंदिर में जो चड़ावा आता है उसके बारे में कोई सवाल RTI Act के तहट नहीं पूछ सकता। प्रधान मंतरी नरेंद्र मोदी ने बड़े जोर शोर्स से श्री राम मंदिर ट्रस्ट की स्थापना का एलान संसद में किया था और ट्रस्ट में अपने ही चुने हुए लोगों को ट्रस्टीज बनाया फिर 2024 के इलेक्शन से पहले राम लल्ला की प्रांट प्रतिष्ठा भी की लेकिन आज जब राम मंदिर में चंदा घोटाले के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं तो प्रधान मंतरी और केंदर सरकार ने बिलकुल चुपी साध ली है CBI ED जैसी एजन्सियों को जांच भी सौंपी नहीं जा रही है क्या लोगों को श्री राम जन्मभूमी मंदिर ट्रस्ट के कामकाज और उसमें दिये जा रहे चढ़ावे के बारे में जानने का अधिकार नहीं होना चाहिए अगर बिना पारदर्शता और जवाब देही के राम मंदे ट्रस्ट जैसी संस्थाइंग काम करेंगी तो जनता के विश्वास का क्या होगा आज इनी मुद्दों पर बातचीत करेंगे जानने भी दो यारों में मैं हूँ अंजिली भारदवाज और मेरे साथ है देश के जाने माने वरिष्ट सुप्रीम कोट लॉयर प्रशान्द भूशन और RTI कारेकरता अमरिता जोहरी देश भर से करोडों लोग अयोध्या जाकर राम जन्मभूमी मंदिर में अपनी मेहनत की कमाई से चढ़ावा देते हैं हाल ही में राम मंदिर से चंदा चोरी होने की खबरों ने लोगों की भावनाओं को बेहत ठेस पहुँचाई है और मंदिर को कितनी इमानदारी से चलाया जा रहा है उस पर बड़े सवाल खड़े कर दिये हैं ये तो सभी मानते हैं कि corruption thrives in secrecy. जहां पारदर्शिता नहीं होती, वहां भ्रष्टाचार पनपता है. राम मंदे ट्रस्ट के कामकाज में गोपनियता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं. अगर देखा जाये तो जगनाथ मंदिर, वैश्णो देवी मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर सभी डेडिकेटिट कानूनों के तहत बनाए गए हैं बलकि एक सरकारी स्कीम के तहट मंदिर की स्थापना ट्रस्ट के रूप में की गई। सूचना के अधिकार कानून के तहट अगर कोई नागरिक राम मंदिर ट्रस्ट से सूचना मांगते हैं तो उन्हें कहा जाता है कि ये तो ट्रस्ट है पब्लिक अथॉरिटी नहीं है और RTI आक्ट के दाइरे में नहीं आता सरकार का इस पर कोई कंट्रोल नहीं है इसलिए अगर कोई ट्रस्ट के कामकाज के बारे में कुछ जानना चाहे या जहां मंदिर के चढ़ावे को गिना जाता है उस काउंटिंग रूम के CCTV कैमरा की फूटेज की कॉपी लेना चाहे या चढ़ावे की गिनती के लिए जो SOP, Standard Operating Procedure, State Bank of India और Ram Janmabhoomi Trust के बीच साइन ह की तरह गोपनियता बनाई गई है तो ये तो एक ट्रेंड नजरा रहा है मोधी सरकार में बड़े बड़े फंड, संस्थाएं जिन में लाखों करोडो रुपे पबलिक से एकठे किये जाते हैं और जिनके बोर्ड पर प्रधानमंत्री खुद बैठते हैं या उनके चुने हुए लोग बैठते हैं, उन्हें ट्रस्ट के रूप में सेटअप किया जा रहा है, और लोगों को कहा जा रहा है कि वे RTI आक्ट के तहट उनसे कोई सूचना नहीं ले सकते हैं. तो प्रशान बिलकुल गोपनिय तरीके से परदे के पीछे बिना पबलिक स्क्रूटनी के काम चल रहा है आप इस सब को कैसे देखते हैं देखे ये ट्रस्ट तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनाया गया भारत सरकार ने बनाया एक scheme के तहट बनाया, उन्होंने कानून भले ही ना बनाया हो, लेकिन एक scheme के तहट बनाया, और इसमें जनता का पैसा आता है, जो जनता के लोग हैं, जो वहाँ आस्था से आते हैं, वो वहाँ चढ़ावा देते हैं, तो पूरा जो प्रोसेस है राम मंदिर का निर्मान जो इस ट्रस्ट ने किया जिसमें कि कहते हैं कि 2000 करोड से ज़्यादा खर्च हुआ उसके बाद जो ये चढ़ावा आता है जो कहा जा रहा है कि अब तक कम से कम 8000 करोड आ चुका है जिसमें की गबन और बहुत हेरा फेरी के आरोप लगे हैं और सामने आये हैं तो ये सब देखने का और इसकी जवाब देही मांगने का तो हक जनता को है होना चाहिए RTI institution notification RTI जाइए जिससे कि लोग देख सकें कि हो क्या रहा है क्योंकि यहां पर तो बहुत सारे आरोप लग रहे हैं पहले तो यह आरोप लगे कि भी राम मंदिर के लिए जो जमीन खरीदी गई इस पूरे संस्थान के लिए उसमें बहुत घोटाला हुआ कि जो जमीन उससे उसी दिन कुछ घंटों पहले दो करोड की बिकी थी उसको अठारा करोड में खरीद लिया इस तरह के बहुत सारी चीज़ें सामने आई हैं उसी तरह से मंदिर के निर्माण में जिसमें कहते हैं दो जार करोड खर्च हुआ उसमें कई लोगों का आरोप लगा है जो वहाँ प तो इन सब चीजों पर पारदर्शता होनी चाहिए नहीं तो ये माना जाएगा कि जो सरकार है और जो पार्टी सरकार को चला रही है और जिन लोगों को इसका काम सौंपा गया है ट्रस्ट का ट्रस्टी बनाया गया है वो लोग सब मिलकर जनता का पैसा लोट रहे हैं बिल्कुल इससे तो यही सस्पिशन राइज होता है कि यह पैसा जरूर और उपर जा रहा होगा सिर्फ यह ट्रस्टीज का मामला नहीं है अगर सरकार इनको बचाने का काम कर रही है दोनों राज सरकार और केंद्र सरकार अमरता अगर आप थोड़ा बताएं कि जो श्री राम मंदिर ट्रस्ट है, ये कैसे बनाया गया है और जो दूसरे देश में जो बड़े मंदिर चल रहे हैं, वो कैसे सेट अप हैं? राम मंदिर ट्रस्ट की गवर्निंस और एडमिनिस्ट्रेशन को अगर हम देश के बाकी बड़ी मंदिरों से कमपेर करें, तो ये साफ नजर आता है कि ट्रस्ट के स्ट्रक्चर, गवर्नन्स और उसकी फंक्शनिंग को लेकर बहुत ही कम जानकारी पबलिक डुमेन में है जैसे कि अगर हम देश के तीन बड़े मंदिर देखें, माता वैश्णु देवी मंदिर, उडिसा का जगनात मंदिर और काशी विश्वनात मंदिर, ये तीनों मंदिरों की स्थापना specific कानूनों के तहट की गई, तो यानि कि state assembly ने specific कानून पास किये, जैसे कि वैश्णु दे expenditure की reporting के किस तरीके से चढ़ावा हो रहा है उसको कैसे आप report करेंगे एक certified चार्टेड अकाउंटेंट द्वारा हर साल ऑडिट कराना है इन तीनों ट्रस को अपने सारे इनकम और expenditure का और साथ में तीनों ट्रस को एक administrative annual report तैयार कर दिया यानि कि पूरी functioning की annual report trust report public domain बाकी दोनों trust को अपनी annual report legislative assembly के सामने पेश करनी है यानि कि एक पूरा legislative oversight और एक public monitoring का एक पूरा तरीका है यदि इन तीनो के बोर्ट स hadeकारों में पुरा समारा polis कदावन चास से कितनचे रंगी Skirt की तोहाँ साभां一下 पर पूरा साहि की धीरतuth यहां तो इससे हम कृत्यान करें जो कि श्रीराम गुंभी कदावन चाहिए ट्रस्ट जिसको कि आमदार सम राममंद्र ट्रस्ट बोलते हैं तो इसका गठन बोला जाता है कि एक ट्रस्ट डीट के तहट हुआ और केंद्र सरकार या राज्य सरकार ने इसका गठन किसी भी special कानून के तहट नहीं किया इन फाक्ट कोई गजेट नोटिफिकेशन या आदेश के तहद भी नहीं किया एक स्कीम बनाई गई और उस स्कीम के बाद एक अलग से ट्रस्ट डीड रिजिस्टर की अगर हम देखें ओडिटेड अकाउंट्स और एन्वल रिपोर्ट के मुद्देव को तो किसी को ये जानक ने 70 एकर जमीन दी थी इस प्रस्ट को पूरी मैनेजमेंट के लिए और construction के लिए वो स्कीम के भी copy public domain में नहीं है तो हमें नहीं पता कि क्या ट्रस्ट को एक annual report बनानी है क्या वो annual report Parliament के और विधानसभा को पेश होनी है और अगर आप ट्रस्ट की वेबसाइट पर जाएंगे तो ना तो अकाउंट्स का कोई भी ब्योरा है और ना ही कोई भी एन्वल रिपोर्ट उपलब्द है हाला कि अगर देखा जाए तो ये trust केवल domestic donation नहीं ये तो foreign contribution FCRA के तहट भी ले रहा है और Indian Express ने हाली में एक report rent करी थी जिसमें कि उन्होंने बताया कि 2020 में जब एक audit करवाया गया था trust का तब उस audit firm ने ये सवाल खड़ा कर दिया था कि इसकी पूरी management highly unprofessional है और उन्हें ये भी बोला था कि जो भी donation आ रहे हैं उसका कोई भी systematic tracking नहीं की जा रही है RTI के मुद्दे को अगर हम देखें तो trust और केंदर सरकार दोनों मिलकर बोल रहे हैं कि RTI लागू नहीं होगा इस trust पे क्योंकि ये एक स्वतंत्र ओर्गनाइजेशन है ये एक independent organization है और इसे लोगों के पास कोई तरीका नहीं है कि वो जानकारी हासल करें कि ट्रस्ट में कितना पैसा आया है अनुमान लगाया जा रहा है कि जब से ट्रस्ट शुरू हुआ है तब से साढे तीन हजार करोड़ तो केवल कैश में एकठटा किया गया है मतलब कि अभी हम सोना चांदी जूलरी की बात भी नहीं कर रहे लेकिन यह सब अनुमान है क्योंकि कि कोई भी ऑफिशियल जानकारी उपलब्द नहीं है तो प्रशांत ना केवल ट्रस्ट जो राम मंदिर का है आयोध्या में वह सूचना के अधिकार कानून के दायरे में आने से मना कर रहा है बल्कि सरकार