
Summary
एक वर्ग ये आवाज उठाता रहता है कि इतने साल हो गए, अभी तक अगर गैर बराबरी दूर नहीं हुई, इसका मतलब रिजर्वेशन के टूल से गैर बराबरी दूर नहीं की जा सकती है।
“दुनिया में आरक्षन के अलामा दूसरी कोई विवस्था ऐसी नहीं है जिसने इतने कम वक्त में इतनी बड़ी आबादी के जिन्दगी में आमूल चूल परिवर्तन कर दिया”From the report
एक वर्ग ये आवाज उठाता रहता है कि इतने साल हो गए, अभी तक अगर गैर बराबरी दूर नहीं हुई, इसका मतलब रिजर्वेशन के टूल से गैर बराबरी दूर नहीं की जा सकती है। दूसरा वर्ग अभी ये demand कर रहा है कि reservation के cap को और ज्यादा करना चाहिए, एक सवाल उठाय जाता है कि जब इतने सालों से reservation देने के बाद भी स्थिती या गैर बराबरी वो दूर नहीं हुई, क्या ये tool कारगर है? reservation के अलावा दुनिया में कोई दूसरी policy ऐसी नहीं होगी जिसने देश की, दुनिया की सबसे बड़ी आबादी जो जाती के नाम पर वंचित थी उसमें एक middle class पैदा किया उसमें education पैदा किया उसमें employment पैदा किया उनको empowered किया हम इस पर डिबेट आप कर सकते हैं कि जितना करना चीहे था उतना नहीं किया होगा लेकिन जितना आरक्षण ने दिया उतना दूसरी कोई पॉलिसी इंपावर्मेंट नहीं कर सकती थी हमने आज तक इसका कोई मेकनिजम आरक्षण के अलावा क्या डेवलप किया? कि वो जो घाउ में रह गया अचूद बन के मैला डोता रहा, वो देश चलाने में 75 साल बाद कहीं आया? जाता है आप गिनाते सांसद बना दिया विदायक बना दिया हिए वह नहीं चाहिए वह पपेट होते हैं पार्टियों के कि जब कोई आईएस बनता है जब कोई भियोरोकरेट बनता है कोई ओच मेमिडियम हाउस में बैठता ही आदिवासी मीडिया हांसे बैठता ना तो हस्देव के जंगल पर महीने में दो शो करता वह छत्तेसगढ़ के आदिवासियों की समस्या पर शो करता 90 90 स्तुबिसी कहा है एक परसेंट से लेकर के तीन परसेंट तक जाते आते आप ठख जाएंगे तो जहां reservation आपका नहीं है वहां तो SC, ST, OBC पहुँच भी नहीं पाया अब आप private sector में कहते हैं कि हम merit के आधार पर appointment करते हैं merit में cost तो आडे नहीं आती आपके मताबिक फिर diversity index एक बार जारी करके दिखा देजिये इसलिए मैं कह रहा हूँ कि दुनिया में आरक्षन के अलामा दूसरी कोई विवस्था ऐसी नहीं है जिसने इतने कम वक्त में इतनी बड़ी आबादी के जिन्दगी में आमूल चूल परिवर्तन कर दिया इसलिए हम उसके इस बात से सहमत होते हैं प्राइवेट सेक्टर में रिजरवेशन क्यों नहीं होना चाहिए जैसे मंडल कमिशन की रिपोर्ट एक जिकर कहती है बीपी मंडल लिखते हैं अगर आपने सरकार से एक रुपए भी फाइदा लिया तो आप फिर private कैसे रहें? सरकार का पैसा तो जिनता का पैसा क्या इन company को बहुत कम दाम पर बिजली, पानी, जमीन, सरकारी सुविधाएं, tax में छूट तो वो किस का पैसा है? प्राइवेट सेक्टर में इसलिए reservation इस देश की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है आखरी में मैं कहना चाहूँगा कि अगर diversity नहीं होगी मेरे classroom में अगर केवल पुरुष बैठे होंगे तो चिंता मुझे होनी चाहिए बतोर सिक्षक मुझे ये तरक नहीं कहना चाहिए कि जो merit से आना था आ गया नहीं आपका पैमाना इसका मतलब गलत है वो जो लड़कियां क्लासरूम में नहीं आ पाईं, वो अगर कम मेरिट वाली है तो उसकी वज़े क्यों नहीं पैचानते आप?