
Summary
मैंने बेरोजगार युवाओं के कमरों को देखा है ज्ञाक करके छोटा सा कमरा, चार, पांच लड़के घर में किसी तरह मंगवाये हुए पैसे घर से कोचिंग की फीस तक का पैसा देना कठीन हो जाता है
“क्योंकि उसकी मा अब ठक चुकी है पड़ोसियों को जवाब दे दे करके, कि बेटा क्या कर रहा है, बेटी क्या कर रही है, तो बोलती यह तयारी कर रहा है।”From the report
मैंने बेरोजगार युवाओं के कमरों को देखा है ज्ञाक करके छोटा सा कमरा, चार, पांच लड़के घर में किसी तरह मंगवाये हुए पैसे घर से कोचिंग की फीस तक का पैसा देना कठीन हो जाता है जो दिन में एक बार दाज, चावल और उसी में आलू डाल करके चोखा बना के खा के अपने आपको धन्य मानते हैं और सामने लगे नकशे को टक टक देखते रहते हैं वो युवा पढ़ते पढ़ते इंतजार करते हैं भरती आये भरती जब इंतहान होता है तो चंद लोगों के ब्रस्टाचार का वो चारा बन जाता है वो युआ तूट जाता है और सिर्फ वही युवा नहीं तूटता, उसका परिवार भी तूटता है। क्योंकि उसकी मा अब ठक चुकी है पड़ोसियों को जवाब दे दे करके, कि बेटा क्या कर रहा है, बेटी क्या कर रही है, तो बोलती यह तयारी कर रहा है। और फिर अगले से जवाब आता करें तीन साल से तो तैयरिय कर रहे हैं इस पीड़ा को वही समझ सकते हैं जिनोंने कभी परिशा दी हो जिनका पढ़ाई लिखाई से वास्ता हो