
Summary
काम्याबी उतनी बड़ी होती नहीं जितनी दुनिया उससे बना देती है। और दुनिया कि ये सारी चमक-दमक और नियच सारी खूबसूर्थी ये तै नही कर सकती कि हमारा अंत भी खूबसूरत होगा।
“काम्याबी उतनी बड़ी होती नहीं जितनी दुनिया उससे बना देती है।”From the report
काम्याबी उतनी बड़ी होती नहीं जितनी दुनिया उससे बना देती है। और दुनिया कि ये सारी चमक-दमक और नियच सारी खूबसूर्थी ये तै नही कर सकती कि हमारा अंत भी खूबसूरत होगा। भले ही हम परवीन बाबी जितने दिलकश और खुपसूरत क्यों ना हो तारीख थी 22 चून साल था 2005 मंबई के कूपर हॉस्पिटल में जब पोस्ट मौटम हुआ तो पता चला परवीन डायबिटीस से भी परिशान थी उन्होंने मरने से लगभग तीन दिन पहले तक कुछ भी नहीं खाया था परवीन की मौत multiple organ failure की वज़ेस से हुई थी पूरी दुनिया ने परवीन बाबी को रुपहले परदे पर जीते देखा था लेकिन जब वो शौरत की उचाईयों से होकर गुजरी फिर उससे दूर भाग कर गुमनामी में कहीं खो गई जब वो तूट कर बिखरी और फिर समलने की कोशिश की तब शायद उनके पास ऐसा कोई नहीं था जो इन सब का गवाह बन सके कोई ऐसा नहीं था जो उनके साथ इस सफर में खड़ा रहे और उनकी तनहाई का गवह बन सके शायद यही जिन्दगी का सबसे बड़ा सच है काम्यावी उतनी बड़ी होती नहीं जितनी दुनिया उससे बना देती है और दुनिया की ये सारी चमक दमक और सारी खुपसूरती भी ये तै नहीं कर सकती कि हमारा अंत भी खुबसूरत होगा भले ही हम परवीन बाबी जितने दिलकश और खुबसूरत क्यों ना हो