
Summary
पाकिस्तान-ओक्युपाइट कश्मीर में प्रदर्शन, सिक्योरिटी फोर्सेस के साथ जढपों की खबरें, गिरफतारिया और मौतें, चुनाव के विरोध में लोगों का आंदोलन, इंटरनेट और मोबाइल सेवाई बंद, बिजली और पानी की सप्लाई प्रभावित, पाकिस्तान सरकार के खिलाफ गुस्सा, राजनीतिक व्यवस्था और उछते का रिष्टे को समझना जरूरी
From the report
अल्ला की जात हमारे बाली के बादकरें अल्ला की जात हमारे बाईयु के बादकरें पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान ओक्युपाइट कश्मीर यानी पी ओके लगातार खबरों में है पी ओके में इस वक्त बड़े पैमाने पर प्रोटेस्ट हो रहे हैं कई शहरों में लोग सडकों पर हैं, सिक्योरिटी फोर्सेस के साथ जढपों की खबरे हैं, गिरफतारिया हुई हैं, कई लोगों की मौत और दर्जनों के घायल होनी की रिपोर्ट भी सामने आई हैं इस से बीच एक वीडियो ने पूरे विवाद को और चर्चा मिला दिया इस वीडियो में एक महिला भारत या सेना से मदद की गोहार लगाती दिखाई देती है अब सवाल यह कि आखिर पीओके में ऐसा क्या हुआ कि हालात यहां तक पहुंच गए वहां लोग के इस बात का विरोध कर रहे हैं क्या है पूरा मामना जानेंगे आज किस वीडियो में हाई मैं हूँ प्रगती और आप देख रहे हैं जिस्ट सबसे पहले समझने की इस वक्त पी ओके में आखिर हो क्या रहा है पिछले कुछ दिनों में वहाँ हाला तेजी से बिगडे हैं अलग-अलग रिपोर्ट्स के मताबिक रावलकोट, मुजफराबाद, मीरपूर और आसपास के कई इलाकों में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों के दारान कई जगह प्रदर्शन कारी और सिक्योरिटी फोर्सेस के बीच तक्राव हुआ। मीडिया रिपोर्ट के मताबिक पिछले 24 घंटों में कम से कम 20 लोगों की मौत हुई है और 50 से जादा लोग घायल हुए हैं हालांकि मौत और घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट में अलग-अलग आंक्रे दिये गए हैं इसने नागडो की पुष्टी अभी बाकी है सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियोज में सडको पर घायल प्रदर्शन कारी और अफरत अफरी का माहौल दिखाई देता है कुछ वीडियो में फाइरिंग की अवाजे भी सुनाई देती है वहीं स्थानिया सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर और एक्टिविस्ट लगतार वीडियो संदेश जारी कर अंतराश्ट्र समुदाय से दखल देने की अपील कर रही हैं अब सवाल यह है कि आखिर अचानक ऐसा हुआ क्या कि पूरा इलाका हिंसा की खबरों से भर गया दरअसल पीओके में इस समय लेजिसलेटिव असेंबली की चुनाव कराए जा रहे हैं वहां कुल 53 सीटों की विधान सबा है 27 2 10 में शामजिक राजनीतिक वजहेथ लोगों को वास्तविक प्रतिनिधित नहीं देती। सिर्फ चुनाव करा देने से लोगों कि राजनीतिक शिकायते खत्म नहीं हो जाती। बिछले कुछ महीनों में सर्फ �operational function में सबसे ज्यादा सक्रिय रहा है। B sai society और नागरिक संगठनों का साजा मंच बताता है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने उन्हें रोकने के लिए बल प्रयोग किया इसी दौरान सबसे ज्यादा हिंसा रावल कोर्ट के ड्रेक ईदगाह इलाके से सामने आई कर रिपोर्ट में दावा किया गया कि यहां सिक्यॉरिटी और प्रदर्शन कारियों के बीच हुई जड़ब सबसे ज़ादा खतरनाक रही। और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात की गई है इसी बीच स्थानिया लोगों ने इंटरनेट और मोबाइल सेवाई बंद किए जाने के भी आरोप लगाए हैं यहां तक कि कई इलाकों में बिजली और पानी की सप्लाई भी प्रभावित हुई लेकिन यहां एक और सवाल उठता है अगर विवाद सिर्फ चुनाव का है तो लोग पाकिस्तान सरकार के खिलाफ इतनी गुस्से में क्यों है आखिर चुनाव के भहीसकार की अपील देखते देखते इतना बड़ा आंदोलन कैसे बन गया पीओके में हो रहें मौज़ोदा प्रदर्शन को समझने के लिएghasaolution key समझना परीरेंडा वहां की राजनितिक व्यवस्था है और पाकिस्तान के साथ उछते का रिष्टे को समझना बहुत जरूरी है सबसे पहले समझने कि वहां की राजनीतिक व्यवस्था की काम कैसे करती है पाकिस्तान इस इलाके को आजाद जम्मूर कश्मीन यानि एज के कहता है यहां अपनी विधानसभा है अपना प्रधानमंत्री है और राष्ट्रपति भी है यह सुरक्षा विदेश नीति और सुरक्षा जैसे मामलों के अलावा भी कई महत्वपूर्ण नीतियों में स्थानिय सरकार की भूमिका सीमित हो जाती है यही वजह है कि वहां सेल्फ गवर्नेंस और ग्रेटर ऑटोनिमी की मांग कई सालों से उठती है हालांकि पाकिस्तान सरकार इस दावे को सुखार नहीं करती उसका कहना है कि पीओके में लोकतांत्रिक व्यवस्था है नियमित चुनाव होते हैं और जनता अपने प्रतिनिधि खुद चुनती है यानि कि व्यवस्था को लेकर दोनों पक्षों पस्वीर बिल्कुल अलग है लेकिन मौजूदा आंदोलन सिर्फ राजनीतिक अधिकारों तक सीमित नहीं है जे एसी और दूसरे स्थानिय संघठनों का कहना है कि पिछले कोई समय में जो भी लोग सरकार की नीतियों का विरोध करते हैं उनके प्लाफ कारवाई की जाती है उनका आरोप है कि नेताओं की गिरफ्तारिया प्रदर्शन कार्यों पर बल प्रयोग और सुरक्षा एजेंसी की सक्ति ने लोगों की गुस्से को और बढ़ा दिया यही वजह कि इस बार आंदोलन सिर्फ जेएसी तक सीमित नहीं रहा कई राकों में आम लोग भी इसमें शामिल होने लगे अब सवाल है कि आखिर प्रदर्शनकारी चाहते क्या है दरसल ये विरोध सिर्फ चुनाओं के भहिसकार तक सीमित नहीं है जॉइंट आवामी आक्शन कमिटी यानी जे एएसी ने सरकार के सामने 38 मांगों का एक चार्टर रखा है इनमें कुछ मांगे राजनीतिक है तो कई सीधे आम लोगों की रोजमर्रकी जिन्दगी से जुड़ी है सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्धा उन 12 विधान सबा सीटो को लेकर है जो पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शर्णार्थियों के लिए आरक्षित है JEC का आरोप है कि इन सीटों की वज़े से इसलामाबाद स्थानिय राजनीती पर जरूरत से ज़ाधा प्रभाव डालता है इसने संगठन इन सीटों को खतन करने और स्थानिय लोगों को ज़ाधा राजनीती का धिकार देने की मांग कर रहा है इसके अलावा प्रदर्शन कारी गिरफतान नेताओं और कारे करताओं की रिहाई उनके खिलाफ दर्ज वामलों को वापस लेने और सुरक्षा बलों की कारवाई की नियाएक जाच की भी मांग कर रहे हैं उनका कहना है कि शांतिपून प्रदर्शन करने वालों पर बल प्रयोग नहीं होना चाहिए था लेकिन आंदोलन सिर्फ राजनीती तक सीमित नहीं है जा रही है यह इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा टकराव है इस पूरे घटनाकरम पर दुनिया की नजर है यूनाइटी नेशन ह्यूमन राइट्स ऑफिस ने पीओके में बढ़ती हिंसा पर चिंता जताई है यूएन ह्यूमन राइट्स चीफ वॉलकर टर्क प्रदर्शनकारियों सुरक्षा बलों दोनों की मौतों की तुरंत निष्पक्ष और स्वतंत्र जाच की मांग की है। इसके साथ यूनोंने स्थानिया लोगों की शिकायतों को दूर करने के लिए सार्थक राजनीतिक बाची शुरू करने की भी अपील की है। वहीं यूमन राइट्स की एक और संस्था एमनेस्टी इंटरनाशनल ने भी पाकिस्तान की कारवाई पर सवाल उठाए हैं संगठन का कहना है कि शांती पून प्रदर्शन कारियों के खिलाफ बल प्रियोग, जे एसी पर प्रतिबंद और संचार सेवाई बंद करना गंभीर चिंता का विशे है MNST ने भी जाच जवाब देही तै करने और हालात को सामान्य करने की मांग की है अब बात भारत की भारत का रूख इस मुद्दे पर सालों से साफ रहा है भारत लगतार कहता है कि पीओके समेथ पूरा जम्मू कश्मीर भारत का अभिन हिस्सा है हाली में कारगिल विजजे दिवस के मौके पर रक्षा मंतरी राजनाथ सिंग ने भी यही बात दोहराई उन्होंने कहा कि अगर भविशे में पाकिस्तान के साथ कभी बाचीत होगी तो वो सिर्फ पी ओके पर होगी क्योंकि भारत के मताबिकी उसका अभिन हिस्सा है जिसपर पाकिस्तान ने अवैध कबजा किया हुआ है दूसरी तरफ पाकिस्तान के रक्षा मंतरी खुआजा आसिव के एक बयान ने विवाद और बढ़ा दिया उन्होने पी ओके में प्रदरशन कर रहे लोगों की तुलना भारत से करते हुए उन्हें इंडिया जैसे दुश्मन बताया इतना ही नहीं उन्होने प्रदरशन कारियों के साथ बाचीत की संभामना से भी इनकार किया और सुरक्षा बलों की कारवाई का बचाव किया पूरे घटना क्रम को अंतराश्ट्रे स्तर पर भी चर्चा का विशय बना दिया है। अब आगे क्या होगा ये काफी हद तक चुनाव के बाकी चर्णों, पाकिस्तान सरकार के अगले कदम और प्रदर्शन कारियों के रुक पर निर्भर करेगा। अगर दोनों पक्ष बाचीत का रास्ता अपनाते हैं तो तनाव कम हो सकता है लेकिन अगर टक्राव इस तरह जारी रहता है तो इसका असर सिर्फ पी ओके तक सीमित नहीं रहेगा बलकि पाकिस्तान की घरेलू राजनीती और पूरे कश्मीर मुद्दे पर भी पढ़ सकता है आप इस मुद्दे पर अपनी राय हमें कॉमेंट करके जरूर बताए देश दुनिया और आप से जुड़ी हर खबर के लिए देखते रहे जिस्ट