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Summary
मेरे बाबा पुलिस में आने से पहले, मेरे फादर इंडिया नेवी में Marine Commando थे, उन्होंने इंडिया नेवी को अपने 15 साल दिये हैं. मेरे पिता प्रदर्शन स्थल पर थे, वह फ्रंट लाइन के पास बैरिकेड्स के पास थे, जहाँ पर महत सारा crowd था.
“कोई बात नहीं डूटी के टाइम पर छोटी-मोटी छोटे लगती रहती हैं पर मतलब उनके सर पे चार टाके आया”From the report
My name is Kundal. I am a student of D.U. My father is an assigned Delhi police. मेरे बाबा पुलिस में आने से पहले, मेरे फादर इंडिया नेवी में Marine Commando थे, उन्होंने इंडिया नेवी को अपने 15 साल दिये हैं. My father was at main protest site, he was at the front line near the barricades, जहाँ पर महत सारा crowd था. मेरे भावा जब भी रात में घर आते थे तो वो बोलते थे कि अब ये प्रोटेस्ट, स्टूडियन प्रोटेस्ट नहीं लग रहा है इसने बहुत सारे एंटी सोचल एलिमेंट्स जोड़ चुके हैं उसके अगले दिन ही 25 तारिक को My father was pulled by a rowdy mow and it was almost lynched near the stage of Jantar Mantar. This happened on 25th and around 2pm. He was unconscious at the RML hospital for about 4 hours. रात को 10 बजे के करीब पापा के colleagues उन्हें घर लेके आए और उनकी uniform पूरी फून से लाल थी. उन्हें ऐसे देखके हमारे लिए बहुत painful था. हमने जब उनसे पूछा कि बाबा ये कैसे हुआ तो उन्होंने बताया कि बेटा कोई बात नहीं डूटी के टाइम पर छोटी-मोटी छोटे लगती रहती हैं पर मतलब उनके सर पे चार टाके आया वे थे जो कि छोटी-मोटी छोट नहीं थी