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Summary
Summary coming soon.
From the report
हाई फ्रेंड्स आज तो मन करता है बत आप सही बाते करूँ जनतर मंतर पर जो कुछ भी हुआ देश और दुनिया ने देखा है कुछ शरार्थी बच्चों ने भद्धी भद्धी गालिया बोली किसी भी सब्बे समाज को शोभा न दे ऐसे शब्दों का परयोग किया गया मुझे तो गालिया दिया गयी मेरी सवर्गिय माता को भी गालिया दिया गयी नजाने कितना भड़ा सुरूप था लेकिन मैं आज बात करना चाहता हूँ कि बच्पन में गर्कियां होती है और बच्पन में गर्तियों से सुधरने का अवसर भी होता है और यही तो बच्पना है और इसलिए मैं समाज के अंदर जो अक्रोष है उसको भली बात ही समझ सकता हूँ एक कल्चरल शौक है कि हमारी बेटियां इस प्रकार की भाषा कैसे बोल सकती है लेकिन समय है इन बच्चों को गले लगा करके राह दिखाने का नहीं बदल पाएंगे मैं उन्हें माप करना चाहता हूँ समाज भी मेरी इस बात को स्विकार करें क्योंकि मेरे मन में एकी भाव है कभी कभी दातों तले हमारी जीब आ जाती है खुन निकलाता है लेकिन हम दात तोड़ते नहीं है क्योंकि दात भी हमारे है जीब भी हमारी है बच्चे भी हमारे है उने राह दिखाना हमारा काम है गुमरा को रहा दिखाना कठीन होता है लेकिन कठीन कामों को करना है और इसलिए आओ मैं इन बच्चों को कहते हूँ बच्चों आओ हम देश के लिए साथ मिल करके आगे बढ़े कुछ नया सिखे गलतियों से भी सिखे अपने सपनों को लेकर के चल पड़े देश बहुत आगे बढ़ रहा है आगे बढ़ने वाला है और आपका भी आगे बढ़ना निष्टित हो यही मेरा सपना है मैं आपके लिए जीता हूँ आपके बुद्धवल भविष्य के लिए खपता हूँ आओ हम मिल करके देश को आगे बढ़ाए बहुत बहुत धन्यवाद दोस्तों, बस आओ, गलतियों से शीखो, आगे बढ़ो