
Summary
Summary coming soon.
From the report
कभी-कभी कोषते गोषते हमें बस कोषने की आदत लग जाती है। संचाध रभीय किवसन गए समोसे के size और price को लेकर संचाध में मुद्धा उठाया। अब कुछ लोग लग के Twitter पर गढ़ियाने के देश में समोसे के प्राइस से ज़्यादा जरूरी मुद्दे भी हैं, मगर वो लोग ये नहीं जाते कि ये कितना जरूरी मुद्दा है, समोसा एक उधारण है, मगर मुद्दा कई चीजों का है, जैसे पानी की बॉटल, हमारे देश में आमतर पर पानी की बॉटल 20 रुपे की मिलती है मगर इसी बॉटल के दाव जगे के साफ से बदल जाते हैं इन पानी की एक बॉटल की कीमत ज़ादा से ज़ादा 6-7 रुपे तक आती है और अभी हम इतने emotionless तो नहीं हुए कि पानी जैसी चीज़ का लाब उठाएं और बात सिर्फ पानी की नहीं है सिनेमा घरों में मिलने वाले popcorn जो 400 रुपे से 800 रुपे में बेचे जाते हैं जबकि उसकी वास्तविक कीमत 20 रुपे से 30 रुपे से जादा की नहीं है आदमी फिल्म देखने आ रहा है पॉपकॉन और कूल ड्रिंग बेहिसाब दावों में उसे जबरदस्ती बेची जा रही है क्योंकि बाहर से कुछ लाने नहीं देते अब तीन गंटे की फिल्म है तुम्हें कुछ खाना पीना है तो इनकी मनमरजी वाले रेटो पर इनकी दुकान सही खरीदो और अचम्बे की बात तो ये है कि ये गुंडागर्दी मार्केट में इतने सोफेस्टिकेटेड वे में हो रही है कि लोग अब इसे अडॉक्ट कर चुके क्या सरकार को हर जगे के लिए basic products का price ते नहीं करना चाहिए मोरी सरकार में रहते हुए रवी किशन ने पहली बार तो कोई सही मुद्धा उठाया है उस पर भी troll army उनके पीछे पढ़ गई है अब आप हमें कॉमेंट बॉक्स में बताएं सरकार को इस पर नियम बनाने चाहिए या नहीं
Lead take from Gajendra Singh Bharangar · always check the original on YouTube
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कभी-कभी कोषते गोषते हमें बस कोषने की आदत लग जाती है। संचाध रभीय किवसन गए समोसे के size और price को लेकर संचाध में मुद्धा उठाया। अब कुछ लोग लग के Twitter पर गढ़ियाने के देश में समोसे के प्राइस से ज़्यादा जरूरी मुद्दे भी हैं, मगर वो लोग ये नहीं जाते कि ये कितना जरूरी मुद्दा है, समोसा एक उधारण है, मगर मुद्दा कई चीजों का है, जैसे पानी की बॉटल, हमारे देश में आमतर पर पानी की बॉटल 20 रुपे की मिलती है मगर इसी बॉटल के दाव जगे के साफ से बदल जाते हैं इन पानी की एक बॉटल की कीमत ज़ादा से ज़ादा 6-7 रुपे तक आती है और अभी हम इतने emotionless तो नहीं हुए कि पानी जैसी चीज़ का लाब उठाएं और बात सिर्फ पानी की नहीं है सिनेमा घरों में मिलने वाले popcorn जो 400 रुपे से 800 रुपे में बेचे जाते हैं जबकि उसकी वास्तविक कीमत 20 रुपे से 30 रुपे से जादा की नहीं है आदमी फिल्म देखने आ रहा है पॉपकॉन और कूल ड्रिंग बेहिसाब दावों में उसे जबरदस्ती बेची जा रही है क्योंकि बाहर से कुछ लाने नहीं देते अब तीन गंटे की फिल्म है तुम्हें कुछ खाना पीना है तो इनकी मनमरजी वाले रेटो पर इनकी दुकान सही खरीदो और अचम्बे की बात तो ये है कि ये गुंडागर्दी मार्केट में इतने सोफेस्टिकेटेड वे में हो रही है कि लोग अब इसे अडॉक्ट कर चुके क्या सरकार को हर जगे के लिए basic products का price ते नहीं करना चाहिए मोरी सरकार में रहते हुए रवी किशन ने पहली बार तो कोई सही मुद्धा उठाया है उस पर भी troll army उनके पीछे पढ़ गई है अब आप हमें कॉमेंट बॉक्स में बताएं सरकार को इस पर नियम बनाने चाहिए या नहीं
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