
Summary
भारत में पुलिस बुरुटेलिटी और मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। लोग पुलिस और सेना की जिम्मेदारी मांग रहे हैं, लेकिन उन्हें देशभक्ति की पट्टी पढ़ा दी जा रही है।
From the report
पुलिस बुरुटेलिटी या पुलिस के द्वारा की जाने वाली बरबरता भारत में लंबे समय से एक बड़ी दिक्कत बनी हुई है। जम्मू कश्मीर में पुलिस और सेना ने लोगों के साथ गलत किया। ऐसे कई सारे मामलें हमारे सामने आ चुके हैं। सेना ने खुद अपने उफिशल्स के कोट मार्शल की हैं, पुलिस ने खुद अपने उफिशल्स के खिलाफ इंवेस्टिकेशन कर उनको सजा दिलवाई है, लोगों पर जूते ड्रक्स प्लांट करके उन्हें किसी केस में फसा देना, या और किसी क्राइम में उन्हें जूते तोर पर फसा देना जैसे आरोग पुलिस पर काफी समय से लगते आ रहे हैं दिल्जी दोसांच की अभी आई मुवी पंजाब 95 या सतलू जिसे की अब बैन कर दिया गया है ने हमें यही दिखाने की कोशिश की कि पंजाब में 90 के दशक में पुलिस ने क्या-क्या human right violations की हैं या क्या-क्या बरबरता की है चुकी उस समय के पुलिस के head KPS गिल थे तो वो भी सबसे ज़्यादा सवालों की घेरे में है और पुलिस और सिस्टम से accountability की मांग की जा रही है जो की की भी जानी चाहिए पर अब एकदम से एक पूरा एको सिस्टम हमारे सामने निकल कर आ रहा है जो की हमें जस्टिफाई करने की कोईशिश कर रहा है कि पुलिस ने उस समय पर जो भी किया वो एकदम सही था और हमें देशबक्ती की पट्टी पढ़कर दूसरी तरफ अपना मुंबोंड लेना चाहिए हमेशा से भारत में यही होता है जब भी सेना या पुलिस की एकाउंटिबिलिटी मांगी गई है तो हमें देशवक्ती की पट्टी पढ़ा कर यूं बोला गया है कि आप दूसरी तरफ देखें और शायद इसीलिए आज भी पुलिस की बरबरता की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं क्योंकि जब भी हमने पुलिस से एकाउंटेबिलिटी मांगने की कोशिश की तो हमें देशबक्ती की पट्टी पढ़ा दी गई जब कश्मीरिय…
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Summary
भारत में पुलिस बुरुटेलिटी और मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। लोग पुलिस और सेना की जिम्मेदारी मांग रहे हैं, लेकिन उन्हें देशभक्ति की पट्टी पढ़ा दी जा रही है।
“हमें देशभक्ति की आद दिला दिया जाती है, हमें यह आद दिल इसके ऊपर भी एक ओवर सेट होना बहुत जरूरी है”From the report
पुलिस बुरुटेलिटी या पुलिस के द्वारा की जाने वाली बरबरता भारत में लंबे समय से एक बड़ी दिक्कत बनी हुई है। जम्मू कश्मीर में पुलिस और सेना ने लोगों के साथ गलत किया। ऐसे कई सारे मामलें हमारे सामने आ चुके हैं। सेना ने खुद अपने उफिशल्स के कोट मार्शल की हैं, पुलिस ने खुद अपने उफिशल्स के खिलाफ इंवेस्टिकेशन कर उनको सजा दिलवाई है, लोगों पर जूते ड्रक्स प्लांट करके उन्हें किसी केस में फसा देना, या और किसी क्राइम में उन्हें जूते तोर पर फसा देना जैसे आरोग पुलिस पर काफी समय से लगते आ रहे हैं दिल्जी दोसांच की अभी आई मुवी पंजाब 95 या सतलू जिसे की अब बैन कर दिया गया है ने हमें यही दिखाने की कोशिश की कि पंजाब में 90 के दशक में पुलिस ने क्या-क्या human right violations की हैं या क्या-क्या बरबरता की है चुकी उस समय के पुलिस के head KPS गिल थे तो वो भी सबसे ज़्यादा सवालों की घेरे में है और पुलिस और सिस्टम से accountability की मांग की जा रही है जो की की भी जानी चाहिए पर अब एकदम से एक पूरा एको सिस्टम हमारे सामने निकल कर आ रहा है जो की हमें जस्टिफाई करने की कोईशिश कर रहा है कि पुलिस ने उस समय पर जो भी किया वो एकदम सही था और हमें देशबक्ती की पट्टी पढ़कर दूसरी तरफ अपना मुंबोंड लेना चाहिए हमेशा से भारत में यही होता है जब भी सेना या पुलिस की एकाउंटिबिलिटी मांगी गई है तो हमें देशवक्ती की पट्टी पढ़ा कर यूं बोला गया है कि आप दूसरी तरफ देखें और शायद इसीलिए आज भी पुलिस की बरबरता की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं क्योंकि जब भी हमने पुलिस से एकाउंटेबिलिटी मांगने की कोशिश की तो हमें देशबक्ती की पट्टी पढ़ा दी गई जब कश्मीरिय…
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