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सचिन ने बताया कि उन्होंने नीट के लिए तीन बार प्रयास किया है, लेकिन उन्हें अभी तक सफलता नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने परिवार के साथ रहने के लिए पैसे नहीं हैं, इसलिए उन्हें अपने दोस्तों से मदद लेनी पड़ी।
From the report
लुट कि स्थाने क्या नाम है क्यों हुआ नहीं घोला है घृत हुआ था तीन मही को तो मैं उस टाइम है कोटा में था कोरल पार्क में हिल्या प्लाइक कर रहा था अचीवर प्लसबेज मेरा फीव जब पेपर देकर मैं वापस आए अपने गांव बीव कि से होता था मेरे पापा बिल्कुल कि मुम्मी घर के कामों में रहती है फैमिली मुझे बहुत मुश्किल मेरे दोस्त नहीं था विश्वय और प्रमुख अपने कमरे में वेट करके उनकी हालत मैंने इस बार दिया था आंसर नहीं बताएं मैं बता दूं इंडियन इंस्ट्रीट ऑफ साइंस एजुकेशन और रिसर्च उससे साइंटिस्ट बनते हैं मैं सरसे इंस्पायर होकर कि मैंने जर्नी चुना था मैंने तीन बार निर्दिया 24 में दिया पचीस में दिया शब्द इसमें भी 24 12 12 25 MBBS दिल्ली को नहीं बताए ना भाई ना मम्मी न पापा मेरे सिर्फ तो पाता के रुगों से ट्रेन बाता भी मैं पीडिगट में नहीं मेरे पास एक भी रुपया नहीं था, मेरे दोस्त ने 200 LP के थे, उसी पैसे से मुझे वापस भी जाना 20 तारीक के बाद, कहां रहना है, क्या खाना है, मुझे कुछ आता पता नहीं, बट मुझे किसी तरह यहां पर 5 दिन तक रहना है, किस उमीद से आप लोग यहां आ रहे हैं 26 दिन हो गए हैं कोई गवर्नमेंट का रिस्पॉंस नहीं है कुछ भी पॉजिटिव नहीं हो रहा है तो फिर भी किस उमीद से आप लोग अभी भी आ रहे हैं उमीद ही था कि सर से काफी लगाव था इन्हीं को करके मुझे एक रिसर्च में इंटरेस्ट आया था तो मैं आपकी शरव को कुछ ना हो जाए मैं 6 तारीब को जब प्रोटेस्ट हुआ था तो नहीं आ पाए क्योंकि मेरा साथ तारीब को एजर का पेपर था फोटो में केले तो मैं छमा मांगता हूं
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सचिन ने बताया कि उन्होंने नीट के लिए तीन बार प्रयास किया है, लेकिन उन्हें अभी तक सफलता नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने परिवार के साथ रहने के लिए पैसे नहीं हैं, इसलिए उन्हें अपने दोस्तों से मदद लेनी पड़ी।
“कोई गवर्नमेंट का रिस्पॉंस नहीं है कुछ भी पॉजिटिव नहीं हो रहा है”From the report
लुट कि स्थाने क्या नाम है क्यों हुआ नहीं घोला है घृत हुआ था तीन मही को तो मैं उस टाइम है कोटा में था कोरल पार्क में हिल्या प्लाइक कर रहा था अचीवर प्लसबेज मेरा फीव जब पेपर देकर मैं वापस आए अपने गांव बीव कि से होता था मेरे पापा बिल्कुल कि मुम्मी घर के कामों में रहती है फैमिली मुझे बहुत मुश्किल मेरे दोस्त नहीं था विश्वय और प्रमुख अपने कमरे में वेट करके उनकी हालत मैंने इस बार दिया था आंसर नहीं बताएं मैं बता दूं इंडियन इंस्ट्रीट ऑफ साइंस एजुकेशन और रिसर्च उससे साइंटिस्ट बनते हैं मैं सरसे इंस्पायर होकर कि मैंने जर्नी चुना था मैंने तीन बार निर्दिया 24 में दिया पचीस में दिया शब्द इसमें भी 24 12 12 25 MBBS दिल्ली को नहीं बताए ना भाई ना मम्मी न पापा मेरे सिर्फ तो पाता के रुगों से ट्रेन बाता भी मैं पीडिगट में नहीं मेरे पास एक भी रुपया नहीं था, मेरे दोस्त ने 200 LP के थे, उसी पैसे से मुझे वापस भी जाना 20 तारीक के बाद, कहां रहना है, क्या खाना है, मुझे कुछ आता पता नहीं, बट मुझे किसी तरह यहां पर 5 दिन तक रहना है, किस उमीद से आप लोग यहां आ रहे हैं 26 दिन हो गए हैं कोई गवर्नमेंट का रिस्पॉंस नहीं है कुछ भी पॉजिटिव नहीं हो रहा है तो फिर भी किस उमीद से आप लोग अभी भी आ रहे हैं उमीद ही था कि सर से काफी लगाव था इन्हीं को करके मुझे एक रिसर्च में इंटरेस्ट आया था तो मैं आपकी शरव को कुछ ना हो जाए मैं 6 तारीब को जब प्रोटेस्ट हुआ था तो नहीं आ पाए क्योंकि मेरा साथ तारीब को एजर का पेपर था फोटो में केले तो मैं छमा मांगता हूं
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